मोह और मोक्ष दोनों साथ नही रह सकते : आचार्यश्री महाश्रमण

आचार्यश्री महाश्रमणजी

          26 फरवरी 2016, अहरिया कोर्ट, (बिहार) (JTN) : अहिंसा यात्रा का भव्य झुलुस अहरिया कोर्ट में प्रवेश हुआ ।अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी लगभग एक वर्ष बाद  बैरगाधी से विहार कर अहरिया कोर्ट पहुचे ।वहा नव निर्मित विशाल पंडाल (महाप्रज्ञ कुञ्ज ) में उपस्थित विशाल जनमोदनी को अपने मुख्य प्रवचन र्मव संबोधित करते हुए फरमाया कि -राग और द्वेष यह कर्म ही जन्म और मृत्यु का मूल  कारण है ।यह जन्म और मृत्यु दुःख होते है ,हमारे संसार में दुःख भी है ।जैसे जन्म ,बुढ़ापा ,बिमारी ,मृत्यु दुःख है ।परम पूज्य आचार्य श्री ने दुख पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि प्राणी संसार में दुःख पा रहे है ।अगर संसार में दुःख है तो दुःखके  कारण भी है ,जैन दर्शन के  संदर्भ में विचार करे तो दुःख का कारण कर्म है आश्रव है ।संसार में दुःख है ,दुःख का कारण है तो दुःख मुक्ति भी हों सकती है यानि मोक्ष भी है ,जो जीव मोक्ष में चला जाता है ,स8द्द अवस्था को प्राप्त होंजाता है उसका वापस जन्म मरण नही होता गई हैं जीव सिद्ध होने के बाद संसार भ्रमण नही करता है। दुःख मुक्ति व् मोक्ष पर प्रकाश डालते हुए पूज्यप्रवर ने आगे कहा कि राग द्वेष ये दो छूट जाये तो आदमी को मुक्ति प्राप्त हो सकती है । राग द्वेष छूटेंगे तो वैराग्य आएगा ।मन में वैराग्य हो जाये ,संसार से विरक्ति होंजाये ,भोगो से विरक्ति होंजाये तो फिर मोक्ष दूर नही है। आदमी मन में धन के प्रति ,परिवार के प्रति ,पदार्थो के प्रति मोह न रहे । मोक्ष को पाना है तो मोह को छोड़ना होगा ,या मोह रहेगा या मोक्ष रहेगा । मोह और मोक्ष दोनों साथ नही रह सकते है । समय पर बल देते हुए पूज्यप्रवर ने कहा कि समय तो जा रहा है ,हम इसका लाभ उठाये । यह मनुष्य जीवन हमे प्राप्त है हम इसका मूल्यांकन करे ,इसका लाभ उठाये । यह जीवन में चल रहा है और आगे के बारे में हमे सोचना चाहिए ,धर्म का हम ध्यान दे और जीवन में धर्म का संचय हमे करना चाहिए । धन साथ नही जायेगा धर्म का प्रभाव साथ जा सकेगा  इसलिए त्याग ,तपस्या से रोज धर्म की साधना करते रहे । अपना किया हुआ काम खुद को भोगना होता है धर्म एक ऐसा तत्व है जो हमारे लिए शरण दाता बन सकता है हम धर्म की शरण में रहने का प्रयास करे ।
          मुख्य प्रवचन से पूर्व मुख्य नियोजिका जी ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति  दी।साध्वी प्रमुखा श्री जी ने उपस्थित जनता को फरमाया की -जैसे नदी पार करने के लिए सेतु होते है वैसे ही मनुष्य को संसार समुद्र से पार होने के लिए सेतु की आवश्यकता होती है औऱ उस सेतु का काम हमारे गुरु करते है वे हमे संसार समुद्र से पार ले जाने में सहायक होते है । इस अवसर पर सांसद मोहम्मद तसली मुद्दीन ,पूर्व गृह राज्य मंत्री भारतसरकार ने पूज्य प्रवर का स्वागत अभिनन्दन किया । मुनि अक्षय प्रकाश जी ,मुनि कोमल कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त किये । तेरापंथ सभा अध्यक्ष सागरमल चण्डालिया ने अपने विचार व्यक्त किये । तेरापंथ महिला मंडल व् कन्या मंडल ने गीतिका का संगान किया । ज्ञानशाला के बच्चो ने गीतिका के माध्यम से सुन्दर प्रस्तुति दी ।कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि श्री दिनेश कुमार जी ने किया ।












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