ईमानदार से दूर भागती है दुर्गति: आचार्यश्री महाश्रमण

उत्केला से लगभग दस किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री पहुंचे पास्तीकुड़ी 

Pujya Pravar Ki Raste Ki seva me Nanha Balak - Aaj Ki Photo


19.03.2018 पास्तीकुड़ी, कालाहांडी (ओड़िशा) : भौतिकता की अंधी दौड़ वाली दुनिया से अलग सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की ज्योति लिए, लोगों को आध्यात्मिकता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अखंड परिव्राजक, मानवता के मसीहा आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ ओड़िशा राज्य में गतिमान हैं। 

ओड़िशा राज्य में लगभग तीन महीने से महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ओड़िशा के ग्यारह जिले की यात्रा कर जन-जन तक सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की ऐसी ज्योति जलाई जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में सार्थक साबित हो सकती है। ओड़िशा राज्य के जैन के मानने वाले को कौन कहे अजैन लोग भी इस कल्याणकारी यात्रा से जुड़े हैं और आचार्यश्री के समक्ष विभिन्न संकल्पों को स्वीकार कर अपने जीवन को सफल बनाने की राह पर कदम बढ़ा चुके हैं। 

ऐसे महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ सोमवार को उत्केला स्थित तेरापंथ भवन से मंगल विहार किया तो भवन के आसपास रहने वाले श्रद्धालु परिवारों के साथ दर्शनार्थियों का मानों हुजूम उमड़ आया। सभी की उत्कंठा को अपने दर्शन, मंगल आशीष और मंगलपाठ के माध्यम से समाहित करते आचार्यश्री अपने गंतव्य की ओर मंगल प्रस्थान किया। लगभग दस किलोमीटर की यात्रा कर धवल सेना संग आचार्यश्री पास्तीकुड़ी स्थित एस.एस.डी. हाइस्कूल में पधारे। 

विद्यालय परिसर में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आदमी को चोरी करने का प्रयाास नहीं करना चाहिए। आदमी को जीवन में किसी भी प्रकार की चोरी करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। चोरी नहीं करने वाली चाह मोक्ष करता है। मोक्ष ईमानदार मनुष्यों की इच्छा रखता है। ईमानदार आदमी के धन और समृद्धि का भी आगमन होता है। उसे यश-कीर्ति की भी प्राप्ति होती है। ईमानदार व्यक्ति को सुगति की प्राप्ति हो सकती है। ईमानदार व्यक्ति से दुर्गति दूर भागती है। इसलिए आदमी को अपने जीवन में ईमानदार बनने का प्रयास करना चाहिए। 

आचार्यश्री ने एक कहानी के माध्यम से पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि संतों के कोई अदत्तादान का त्याग होता है। संत के पास तो संतोष का धन होता है। संत का आगमन और प्रेरणा लोगों के लिए लाभदायी हो सकती है। संत के समक्ष तो कितने लोग अपनी बुराइयों का त्याग करते हैं और अपने जीवन को अच्छा बना लेते हैं। संतों की प्रेरणा से लोग अपने जीवन में ईमानदार बनने का प्रयास करें, तो मानव जीवन का एक अच्छा उपयोग हो सकता है। 

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